(अतुल शर्मा)
कभी जो हमारा सहारा थे
आज बेसहारा हैं
और इस अहसास को
मैंने महसूस किया हे
ठीक तुम्हारी ही तरह
कभी जो हमारा सहारा थे
आज बेसहारा हैं
और हम बेबस है
ठीक तुम्हारी ही तरह
जिन हाथों ने थामी थी
कभी छोटी सी अंगुलियां
कराहा था जिनका दिल कभी
नन्हीं आंखों में आंसू आ जाने से
उनको अकेला छोड दिया है
बेरहम हालातों से लड़ने के लिए
बूढ़ी, बेबस और पथराई आंखे
तकती रहीं सहारे के लिए
और हम चले आए वहां से
ठीक तुम्हारी ही तरह।
अतुल शर्मा
कभी जो हमारा सहारा थे
आज बेसहारा हैं
और इस अहसास को
मैंने महसूस किया हे
ठीक तुम्हारी ही तरह
कभी जो हमारा सहारा थे
आज बेसहारा हैं
और हम बेबस है
ठीक तुम्हारी ही तरह
जिन हाथों ने थामी थी
कभी छोटी सी अंगुलियां
कराहा था जिनका दिल कभी
नन्हीं आंखों में आंसू आ जाने से
उनको अकेला छोड दिया है
बेरहम हालातों से लड़ने के लिए
बूढ़ी, बेबस और पथराई आंखे
तकती रहीं सहारे के लिए
और हम चले आए वहां से
ठीक तुम्हारी ही तरह।
अतुल शर्मा
